ग्रोथ या वैल्‍यू इन्‍वेस्टिंग: आपके लिए सही फिलॉसफ़ी | धनक हम निवेश की दो सबसे लोकप्रिय स्‍ट्रैटेजी पर बात कर रहे हैं और बताएंगे कि आपके लिए क्‍या बेहतर है
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ग्रोथ या वैल्‍यू इन्‍वेस्टिंग: आपके लिए सही फिलॉसफ़ी

हम निवेश की दो सबसे लोकप्रिय स्‍ट्रैटेजी पर बात कर रहे हैं और बताएंगे कि आपके लिए क्‍या बेहतर है

वैल्‍यू इन्‍वेस्टिंग: वैल्‍यू इन्‍वेस्टिंग का सिद्धांत बहुत सरल है: प्राइस सबसे अहम है। इसमें वैल्‍यू निवेशक ऐसी कंपनियों की पहचान करते हैं, जिनको मार्केट कम करके आंक रहा है और एक अनुभवी खरीदार की तरह, ये इन कंपनियों के स्‍टॉक्‍स डिस्‍काउंट पर ख़रीद लेते हैं। सोच ये है, अगर आप स्‍टॉक कम प्राइस पर पा सकते हैं तो इसके लिए ज्‍यादा रक़म खर्च क्‍यों करें? ऐसे में निवेशक अपनी वास्‍तविक कीमत से कम कीमत पर ट्रेड कर रहे स्‍टॉक्‍स की पहचान करते हैं, उनको लंबे समय तक होल्‍ड करते हैं और उस समय के लिए इंतज़ार करते हैं, जब मार्केट इनकी सही वैल्‍यू समझ पाए।

ग्रोथ इन्‍वेस्टिंग: ग्रोथ इन्‍वेस्टिंग में प्राइस उतनी अहम नहीं होती है। ग्रोथ इन्‍वेस्‍टर मानता है कि स्‍टॉक चुनते समय अर्निंग को प्राइस की तुलना में ज्‍यादा तवज्‍जो दी जानी चाहिए। वे ऐसी कंपनियों की तलाश में रहते हैं, जो भविष्‍य में ग्रोथ की अच्‍छी संभावनाएं रखती हों और जिन्‍होंने अर्निंग के लिहाज से हाल के वर्षों में शानदार प्रदर्शन किया हो। और अगर ये स्‍टॉक्‍स ऊंची प्राइस पर भी ट्रेड कर रहे हैं तो ग्रोथ इन्‍वेस्‍टर्स का तर्क होगा कि इन कंपनियों की मजबूत अर्निंग हिस्‍ट्री इनको निवेश के लिए आकर्षक बनाती है।

वैल्‍यू इन्‍वेस्टिंग बनाम ग्रोथ इन्‍वेस्टिंग: कौन है बेहतर?

सच ये है कि कोई ऐसी इन्‍वेस्‍टमेंट स्‍ट्रैटेजी नहीं है जो सबके लिए सही तरीके से काम करे। वैल्‍यू स्‍टॉक जिसे आपने वर्षों से रखा है वो एक अंधी गली में जा सकता है, जबकि मजबूत अर्निंग वाला ग्रोथ स्‍टॉक मार्केट सेंटीमेंट में अचानक आए बदलाव की वजह से नीचे जा सकता है। आपको ये बात भी याद रखनी चाहिए कि ग्रोथ स्‍टॉक्‍स वैल्‍यू स्‍टॉक्‍स को उस समय प्रदर्शन के लिहाज से पीछे छोड़ देते हैं जब इकोनॉमी अच्‍छा कर रही हो। और जब इकोनॉमी लड़खड़ा रही तो वैल्‍यू स्‍टॉक्‍स आम तौर पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

आपकी इन्‍वेस्‍टमेंट स्‍ट्रैटेजी आपकी रिस्‍क उठाने की क्षमता और निवेश के गोल पर निर्भर करनी चाहिए। इन्‍वेस्टिंग फिलासफ़ी एक गाइड के तौर पर काम करनी चाहिए न कि पत्‍थर की लकीर की तरह।

आपको क्‍या करना चाहिए ?

हमारा मानना है कि आपकी इन्‍वेस्‍टमेंट फिलॉसफ़ी दोनों का मिश्रण है। आपको इन दोनों फिलॉसफी के चरम बिंदु से बचना चाहिए और पोर्टफ़ोलियो में ग्रोथ और वैल्‍यू स्‍टॉक्‍स दोनों का मिश्रण होना चाहिए।

· वैल्‍यू स्‍टॉक्‍स में निवेश का फ़ायदा मिलने में समय लगता है। इसका ये भी मतलब है कि आपको वर्षों तक बाजार के उतार-चढ़ाव में निवेश को बनाए रखना है। हालांकि, वैल्‍यू स्‍टॉक्‍स ग्रोथ स्‍टॉक्‍स की तुलना में अपेक्षाकृत कम रिस्‍क वाले होते हैं। अगर आप ज्‍यादा रिस्‍क नहीं उठा सकते और वर्षों तक मार्केट में कम अवधि के उतार-चढ़ाव को सामना कर सकते हैं तो आपका पोर्टफ़ोलियो वैल्‍यू साइड की तरफ़ झुका होना चाहिए।
· ग्रोथ स्‍टॉक्‍स वैल्‍यू स्‍टॉक्‍स की तुलना में तेजी से मार्केट से बेहतर रिटर्न मुहैया करा सकते हैं। हालांकि, तेज ग्रोथ की ये संभावनाएं ऊंचे रिस्‍क की कीमत पर आती हैं, खास कर अगर वो ग्रोथ नहीं आती है जिसकी उम्‍मीद की जा रही थी। अगर आप वर्षों तक मार्केट के उतार-चढ़ाव से नहीं गुजरना चाहते हैं और आपकी रिस्‍क लेने की क्षमता अधिक है तो ग्रोथ स्‍टॉक्‍स आपके पोर्टफ़ोलियो का बड़ा हिस्‍सा होना चाहिए।

आप कैसे पहचानेंगे ग्रोथ और वैल्‍यू स्‍टॉक्‍स?
यहां हमने कुछ पैरामीटर दिए हैं जिनसे आप ग्रोथ और वैल्‍यू स्‍टॉक्‍स की पहचान कर सकते हैं।

ग्रोथ या वैल्‍यू इन्‍वेस्टिंग: आपके लिए सही फिलॉसफ़ी


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